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विक्रम साराभाई

 विक्रम साराभाई 



आज भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक व महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की जयंती है। उनका जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ। उनके पिता अंबालाल साराभाई एक संपन्न उद्योगपति थे। जिनकी गुजरात में कई फैक्ट्रियां थी। विक्रम साराभाई के वैज्ञानिक कार्यों को देखते हुए साल 1966 में उनको पद्म भूषण से नवाजा गया। 1962 में उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1972 में मरणोपरांत उनको पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। /



उन्होंने ही सबसे पहले भारत में स्पेस रिसर्च की जरूरत समझी और न्यूक्लियर पावर विकसित करने में मदद की। 1942 में प्रकाशित हुआ पहला साइंस पेपर, भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के रहे अध्यक्ष 

साराभाई का 1942 में पहला साइंस पेपर कॉस्मिक किरणों का समय वितरण प्रकाशित हुआ। वह परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी रहे। उनकी बचपन से ही गणित और विज्ञान में विशेष रुचि थी। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से लौटने के बाद उन्होंने 28 साल की उम्र में 11 नवंबर 1947 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना की और यहां 1966 से लेकर 1971 तक काम भी किया।


साराभाई ने अहमदाबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) की स्थापना में महत्वूर्ण भूमिका निभाई। 1940 में उच्च शिक्षा के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी जाने से पहले विक्रम साराभाई ने गुजरात कॉलेज से पढ़ाई की। 1942 में दूसरे विश्व युद्ध के वक्त विक्रम साराभाई को जबरन भारत वापस लौटना पड़ा। भारत आकर विक्रम साराभाई ने  ब्रह्मांडीय किरणों (कॉस्मिक रे ) पर शोध किया। यह शोध उन्होंने महान वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमण के दिशा-निर्देश में किया। इसके बाद 1945 में विक्रम साराभाई डॉक्टरेट करने के लिए फिर से कैंब्रिज यूनिवर्सिटी वापस लौटे। यहां उन्होंने कॉस्मिक रे पर थीसिस लिखी और 1947 में भारत आए और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना की।

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